रविवार, 13 फ़रवरी 2011

सामूहिक ब्लॉग: समाधान या समस्या ?



मेरी इस पोस्ट से कई लोगों की भवें तन सकतीं है, पर समस्या गंभीर है तो हाथ माने नहीं और यह लेख बन गया मैं अपनी बात को कम से कम शब्दों में रखने की कोशिश करूँगा सबसे पहले आपको ३ फरवरी की एक घटना बताता हूँ,

रविन्द्र प्रभात जी ने लखनऊ ब्लोगर्स एसोसिएशन पर लिखा कि "आज मैं एल. बी. ए. के अध्यक्ष पद से स्वयं को मुक्त करता हूँ" क्यूँ किया ? सही कारण तो मुझे पता नहीं पर शायद किसी धार्मिक विवाद की वजह से ऐसा हुआ, उसी दिन शाम को एक और पोस्ट आई और मैं चौंक गया बात ही कुछ ऐसी थी पोस्ट का टाइटल था "इंडियन ब्लॉगर्स असोसिएशन का आगमन होने जा रहा है, आईये सदस्य बनें !" यह पोस्ट लिखी थी सलीम खान जी ने!

मुझे लगा कि शायद सलीम खान जी ने इस घटना से सीख कर एक नया मंच बनाने की कोशिश की है और क्यूंकि उनका दावा है कि यह और ज्यादा शक्तिशाली मंच होगा तो मैंने सोचा कि इस बार काफी कड़े नियमों के साथ एक नये मंच का प्रारंभ होने जा रहा है, यह सोच कर मैं उनके द्वारा लेख में दिए गए लिंक All India Bloggers' Association ऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन पर पहुंचा पर नतीजा ढाक के तीन पात!!!

कोई शर्त नहीं, कोई पात्रता के नियम नहीं, जिसका मन हो जुड जाइये, ना नए एसोसिएशन का कोई उद्देश्य बस जी जुड जाइए हम सबसे शक्तिशाली मंच बनाएंगे पर किसलिए भाई?  
क्या करोगे ये शक्तिशाली मंच बना कर?
क्या उद्देश्य है इस मंच का?  
किस विषय पर लिखवाना चाहते है?
किस समस्या को आप हल करने वाले हैं ? जो लखनऊ ब्लोगर्स एसोसिएशन पर हल नहीं हो पा रही थी

और कमाल की बात ये कि खुद लखनऊ ब्लोगर्स एसोसिएशन का उद्देश्य क्या था, कोई जानता है ?

अब बात करता हूँ एसोसिएशन की, क्या बला है  एसोसिएशन? परिभाषा मैंने विकीपीडिया से चुरा ली है आप खुद ही पढ़ लीजिए "लोगों का एक समूह जो एक किसी खास उद्देश्य को पूरा करने के लिए एक सूत्र में बंधते हैं " (a group of individuals who voluntarily enter into an agreement to accomplish a purpose ) मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि इस तरह से समूह से जुड़ने वाले ८०% लोगों को पता ही नहीं होगा कि किस उद्देश्य की पूर्ती के लिए हम आपस में जुड रहे हैं ? 

क्यूँ जुड़ते हैं लोग ?  मैंने खोजने की कोशिश की कि आखिर लोग क्यूँ जुड़ते हैं ऐसे समूह से ? यह मकसद मेरे समझ में आया "मेरा लेख मेरे चिट्ठे पर ही रहेगा तो हो सकता है सिर्फ २-४ लोग ही पढ़ें पर यदि एक समूह चिट्ठे पर रहेगा तो अधिक से अधिक लोग पढ़ पाएंगे", यदि यही है आपका उद्देश्य तब तो हो चुकी आपकी शक्तिशाली मंच बनाने की आश पूरी, सोच सोच कर खुश होते रहिये कि हम एक विशाल मंच बना रहे हैं जिस पर एक ही दिन में सौ से ज्यादा पोस्ट आ जाती हैं करते रहिये अपना सीना चौड़ा और मनाते रहिये अपनी झूठी सफलता पर गर्व |

मुझे समस्या क्या है ? आप लोग मुझसे पूछेंगे कि मुझे क्या समस्या है कि मैं इतना लंबा चौड़ा पोस्ट लिख रहा हूँ? तो मेरी समस्या बहुत छोटी सी है वो ये कि मुझे अच्छे लेख पढ़ने के लिए चाहिए ना कि पूरा ब्लॉग जगत एक ही लेख से भरा चाहिए, जी हाँ आज जिधर भी नजर दौडाई कुछ ही लेख हर जगह पढ़ने को मिले उदाहरण के लिए  एक लेख लिखा गया है "मीनाक्षी पन्त" जी के द्वारा नाम है "मत रो आरुषि" ये लेख आपको निम्नलिखित जगह पर मिलेगा


हिंदुस्तान का दर्द पर मत रो आरुषि
दुनिया रंग रंगीली पर मत रो आरुषि
आल इंडिया ब्लोगर्स एसोसिएशन पर मत रो आरुषि 
स्वतन्त्र विचार पर मत रो आरुषि

मीनाक्षी जी का मैंने सिर्फ उदाहरण दिया है, समूह ब्लॉग पर लिखने वाले ब्लोगर यही करते हैं, सबसे पहले अपना लेख लिखा फिर अपने लेख को सभी समूह ब्लॉग पर पोस्ट कर दिया, इनके पाठक बढ़ गए और समूह चिटठा चलने वाले को यह खुशफहमी हो गयी कि मैंने एक शक्तिशाली मंच बना दिया है|

अंत में: सभी समूह ब्लॉग के अध्यक्षों से मेरा यह आग्रह है कि अपने सामूहिक ब्लॉग का कोई उद्देश्य निहित कीजिए और उस उद्देश्य के अनुसार ही लोगों को उसमे सम्मिलित कीजिए, और सच में एक शक्तिशाली मंच बनाइये, इस समय हिन्दी ब्लोगरों की एक विकट समस्या है कि विभिन्न अखबार तथा पत्रिकाएं उनके लेख बिना पूछे ऑर कभी कभार तो किसी ऑर के नाम से प्रकाशित कर देतीं हैं, मेहनताने की बात तो छोड़ ही दीजिए, सलीम जी क्या आपके इस एसोसिएशन से जुड़े सदस्य या आप खुद इस समस्या के लिए कुछ करेंगे? यदि नही कर सकते तो आप खुद ही सोचिये कि क्या फायदा आपके अध्यक्ष होने का क्या एक अध्यक्ष का कार्य सिर्फ नये नये एसोशिशन ( बिना उद्देश्य का ) बनाते रहना ही होता है ?

इतना कुछ लिखने के बाद मैं कुछ अच्छे सामूहिक ब्लॉग के बारे में लिखना चाहूँगा जिनका कोई उद्देश्य है और वो उसी उद्देश्य की तरफ प्रयासरत हैं

१. साइंस ब्लोगर्स एसोसिएशन (साइंस को फ़ैलाने की कोशिश)
२. हिंद युग्म (साहित्य की दिशा में अद्भुत प्रयत्न)
३. रचनाकार (साहित्यकारों को एक मंच प्रदान करता चिटठा)
४. ब्लोगोत्सव-२०१० (इस ब्लॉग के बारे में तो कहा ही क्या जाये, जो कार्य इस ब्लॉग पर हुआ है उसको तो शब्दों में कहा ही नहीं जा सकता)
५. नारी  (नारियों को समर्पित एक ब्लॉग)
६. स्वास्थ्य सबके लिए (स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फ़ैलाने का प्रयत्न)
७. चिटठा चर्चा (अच्छे लेखो की चर्चा करने के लिए बनाया गया एक मंच)

और भी कई सामूहिक ब्लॉग हैं जिनका कोई उद्देश्य है, और उसकी तरफ प्रयासरत हैं, भले ही उन पर कम लेख आते हों पर उन लेखों का कोइ उद्देश्य तो होता है, वो किसी दिशा में आगे तो बढ़ रहे हैं|

ये तो मेरे विचार हैं, एक व्यक्ति के विचार मेरे लिए कोई खास मायने नहीं रखते, एक व्यक्ति (मैं) गलत भी हो सकता हूँ, हो सकता है मैंने सिक्के के सिर्फ एक पहलू को ही देखा हो दूसरा पहलू अनछुआ रह गया हो, आप अपने विचार जरूर रखें जिससे सही दिशा की ओर बढ़ सकें |

और हाँ, यदि आप आल इंडिया ब्लोगर्स एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं तो उसका उद्देश्य भी कमेन्ट में लिखते  जाइये जिससे मेरी गलतफहमी दूर हो जाये - धन्यवाद |

11 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sahi likha hai aapne par ham jaise naye blogger apni pahchan banane ke liye in samuhik blogs se judte hain .ab aap khud dekhiyega ki aapka itna achchha aalekh kitne log padh pate hain .likhte rahiye .best of luck .

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  2. @शिखा कौशिक: तो आपका कहना यह है कि मेरे इस लेख को ज्यादा पढाने के लिए मैं भी किसी सामूहिक ब्लॉग से जुड जाऊं? तो मेरा जबाब यह है कि मैं ऐसा नहीं कर सकता सिर्फ अपने लेख को पढवाने के लिए तो हरगिज नहीं, सिर्फ तब ही किसी ब्लॉग में शामिल होऊंगा जब मेरे पास एक उद्देश्य होगा और मैं उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए ही या तो किसी सामूहिक ब्लॉग से जुडूगा |

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  3. बढिया आलेख. ये बिल्कुल ज़रूरी नहीं कि अपना आलेख पढवाने के लिये किसी समूह से जुड़ा जाये. लिखने में दम है, तो पाठक अपने आप आयेंगे.हां उद्देश्य परक समूह से जुड़ना अलग बात है.

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  4. बड़ीया आलेख ! पूरी तरह से सहमत हूं !

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  5. योगेन्द्र जी---
    ब्लोग लेखन एक प्रकार का साहित्य ही है....सामूहिक ब्लोग उसी प्रकार है जैसे विभिन्न कवियों की कविताओं का काव्य-संग्रह, कहानियों का कहानी संग्रह आदि....इनका उद्देश्य बहुरन्गी/बहु उद्देशीय/बहुविषयक साहित्य पढवाना होता है, विभिन्न साहित्यकारों के आलेख आदि का संग्रह एक स्थान पर....आपने जो ब्लोग दर्शाये हैं उनका दायरा संकुचित है, वे विशेषग्य( जो वास्तव मे विशेष्ग्य न होकर सामान्य स्तर से लेकर निम्न स्तर तक के ही हैं--सिर्फ़ कुछ एकदम विशिष्ट-विषय वाले ब्लोगों को छोडकर...) ब्लोग हैं और विशेषग्य विषयों की गुणवत्ता पर मूलग्रन्थों के अतिरिक्त किसी पर कोई क्यों भरोसा करेगा अतः लिखना व्यर्थ ही हैं.....
    --आखिर चिट्ठा-चर्चा मंच का क्या उद्देश्य है..वही कुछ चिट्ठे जो किसी विशेष चर्चाकार को अचछे लगे एक ब्लोग(मंच) पर पढ्वा दिये...क्योंकि हर व्यक्ति हर ब्लोग तक नहीं पहुंच सकता......बस यही उद्देश्य है.....

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  6. डॉ. श्याम गुप्ता जी,

    आप ने जिन सामूहिक ब्लोगों को निम्न स्तर का कहा है, क्या आपको पता है वो क्या कार्य कर रहे हैं?

    कौन से ब्लॉग को आप निम्न स्तर का कह रहे हैं? हिंद युग्म को? या नारी को या साइंस ब्लोगर्स एसोसिएशन को?

    क्या आपको पता है इन ब्लॉग पर राम और अल्लाह को लेकर कभी कोई लड़ाई नहीं हुई है?

    जो कि लखनऊ ब्लोगर्स एसोसिएशन पर कुछ ही समय पहले हुई थी और उसी के कारण रविन्द्र प्रभात जी ने त्यागपत्र दिया था, अल्लाह और राम के ऊपर भद्दे कमेन्ट करवाने के लिए ही आप जैसे कुछ लोगों ने आल इंडिया ब्लोगर्स एसोसिएशन बना लिया है, किसी और को निम्न स्तर का कहने से पहले खुद के गिरेबान में झाँक दे देख लें तो बेहतर होगा

    और यदि सिर्फ उद्देश्य यही है कि सभी लोगों को एक ही जगह काफी कुछ पढ़ने को मिल जाये तो सिर्फ एक ही मंच रखिये क्यूँ अपने अपने चिट्ठे भी बना रखे हैं सभी लोगों ने एक ही लेख को दस जगह लिखना कहाँ की समझदारी है?

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  7. स्वास्थ्य-सबके लिए ब्लॉग को चर्चा में शामिल करने का आभार।
    यद्यपि मैं टिप्पणी पर टिप्पणी अथवा पोस्ट लिखने के पक्ष में नहीं रहा हूं,केवल इतना निवेदन करुंगा कि सबको अपनी बात रखने दीजिए। क्या ज़रूरी है क्या नहीं,कौन आला दर्जे का काम कर रहा है और कौन औसत दर्जे का-यह पाठक तय करेंगे और ध्यान रहे कि पाठक केवल ब्लॉगर नहीं हैं। अधिकतर ब्लॉगर तो टिप्पणीकार ज्यादा हैं,पाठक कम। असली पाठक वे हैं जो बिना आपकी टिप्पणी के भी आपके ब्लॉग पर आते हैं।

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  8. योगेन्द्र जी....सबको पता है कौन क्या कर रहा है...बात पोस्टों के स्तर की है ब्लोग की नही...आपकी इच्छा है आप मानें न मानें...
    ---आपने जो लडाई की बात कही वह राम व अल्लाह की नहीं थी...पोस्टों व कमेन्ट्स को ठीक प्रकार से समझ कर पढिये....उस लडाई का कारण(लडाई नहीं तर्क-वितर्क---हांजी--हांजी कह कर आप क्या प्राप्त कर लेंगे,एसे तटस्थ लोग/विद्वान ही अधिक अपराधी होते हैं समाज में व्यतिक्रम आने के) एक व्यक्ति के अपने को भगवान व दूसरों को जबर्दस्ती ग्यान देने व मास्टरी करने का शौक व अभद्र भाषा प्रयोग था.....

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